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अलग हटके

एक ऐसा गांव जहां घर की नेमप्लेट पर है सिर्फ घर की बेटियों का नाम

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लड़कियां अपनी नाम की पट्टियों के साथ

Pooja cloths house

लड़कों के नाम से समाज में पहचान बनाना तो आम बात है। बदलते दौर ने भले ही लड़के और लड़कियों को समान दर्जा दे दिया है। लेकिन मानसिकता में अभी भी लड़कें और लड़कियों के बीच का फासला उतना ही बरकरार है। जितना की पहले हुआ करता था। मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में इस भेदभाव को बिल्कुल निरस्त कर दिया है।

अपने घर के बाहर अपने नाम की नेमप्लेट लगाती लड़कियां।

बैतूल जिले के खंडारा गांव में ‘डिजिटल इंडिया विद लाडो’ अभियान के चलते एक अनोखी मुहिम का आगाज़ किया गया। जिसके चलते गांव के घरों की पहचान घर की बेटियों से होती हैं। अक्सर ऐसा देखा गया है कि घरों की नेम प्लेट पर घर के मुखिया का नाम पाया जाता है। इसमें कोई दोराय नहीं कि आधुनिकता के चलते लड़कियों ने हर क्षेत्र में प्रगृति की हैं। फिर चाहें वो शिक्षा का क्षेत्र हो या खेल-कूद का।

पूरे गांव में सभी घरों के बाहर नामपट्टियां लगी हुई हैं।  कमाल की बात यह है कि उन नेम प्लेटों पर घर की बेटियों का नाम सुसज्जित है। खड़ारा गांव के बाद अब इस अनोखी व नई पहल ने शहर के तमाम क्षेत्रों को जोड़ लिया हैं। मध्यप्रदेश के प्रचलित शहर बैतूल में भी इस मुहिम को सराहा, साथ ही अपनाया भी है। जिन लोगों के घर के बाहर पहले से नेम प्लेट लगी हुई थी। उन्होंने उन्हें बदल कर घर की बेटियों के नाम वाली नेम प्लेट को लगवाया और कुछ ने तो स्वयं अपने हाथों से नेम प्लेट बना घर के बाहर लगाई।

घर की बेटी के नाम की नेमप्लेट लगते लोग।

– गांव के एक निवासी ने की थी शुरूआत

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लड़कियां अपनी नाम की पट्टियों के साथ

दरअसल, इस मुहिम की शुरुआत खंडारा गांव के निवासी अनिल यादव ने की थी। जो कि स्वयंसेवी है। इनकी इस पहल के चलते आज खंडारा गांव के 250 घरों में से करीब 200 घरों में इस तरह की नेम प्लेटें लगाई जा चुकी है। अनिल के अनुसार, ऐसा करने से वे न केवल घर की बेटियों का आत्मविश्वास बढ़ायेगें। बल्कि उनके नज़रिये से यह बेटियों को सम्मान देने की एक छोटी सी कोशिश होगी। क्षेत्र के शासकीय कन्या स्कूलों ने भी इस मुहिम में अच्छा खासा योगदान दिया। प्रभावित क्षेत्र में बेटियों की बेहतर शिक्षा के लिए ‘उड़ान एक नई सोच’ जैसे अभियानों को भी चलाया जा रहा है। जो की सराहनीय है।

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