"> ');
Home » यहां दवा-दुआ से नहीं बल्कि एक किलो मिठाई और एक मुर्गे से होता है इलाज
अलग हटके

यहां दवा-दुआ से नहीं बल्कि एक किलो मिठाई और एक मुर्गे से होता है इलाज

सांकेतिक चित्र

Pooja cloths house

कहते है दवा और दुआ से सब संभव है। जब भी कभी लोगों को कोई बिमारी या कोई अन्य समस्या होती है, तो लोग दवा का सहारा लेते हैं। जब दवा बेअसर हो जाती हैं, तो लोग दवा के साथ-साथ दुआ का भी सहारा लेते हैं। ऐसा मानना हैं कि दुआ बिगड़े काम बना देती है।

सांकेतिक चित्र

यूं तो हमारी देश की संस्कृति में ही आस्था है। अपनी भक्ति पर विश्वास करने वालों की संख्या यहां कम नहीं, लेकिन यह विश्वास कब अंधविश्वास में बदल जाता हैं । यह लोगों को भी पता नहीं चल पाता। विश्वास और अंधविश्वास में एक बात जो सबसे सामान्य है, वह यह है कि दोनों का उपयोग भक्त अपने फायदे के लिए करता है।

आये दिन हम अंधविश्वास पर आधारित किस्से व कहानियां सुनते ही रहते हैं। अक्सर जिन्हें सुन हम हैरान रह जाते है कि ऐसा कैसे संभव है। ऐसे ही अंधविश्वास की कहानी खंडवा गांव से जुड़ती है। इस गांव के लोग दवा और दुआ के मुकाबले एक किलो मिठाई और एक मुर्गे पर ज्यादा भरोसा रखते हैं।

सांकेतिक चित्र

यहां लोग इलाज के बजाये झाड़-फूंक में विश्वास रखते है। यहां अस्पताल नहीं बाबा के डेरे चलते हैं। यह स्थान कुपोषण से ज्यादा ग्रस्त पाया गया है। जब भी कभी यहां कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है। तो उसे दवा नहीं, बल्कि झाड़-फूक करने वाले बाबा को मिठाई और मुर्गे का सेवन कराया जाता है। इसके चलते यहां के प्रशासन के पुर्निवास पोषण ने भी दम तोड़ दिया है।

सांकेतिक चित्र

अस्पताल में भर्ती मरीजों को वहां से निकाल बाबाओं के दर पर ले जाया जाता है। और तो और ग्रामीणों के अनुभव से ऐसा करने से उनके बिगड़े काम बन जाते हैं। इन सब से निपटने के लिए प्रशासन ने कई प्रयास किये। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। लोगों को इस अंधविश्वास की दलदल से निकालना बेहद जरुरी है। उसके लिए प्रशासन के प्रयास अभी भी जारी है।

 

By: Vanshika Saini

We are hiring

Suraj mobile center

Suraj mobile center