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तो क्या होता है अस्टियोपोरोसिस?


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वैसे तो बढ़ती उम्र के साथ हडि्डयों का कमजोर होना आम बात है। बढ़ती उम्र के इस पड़ाव में फ्रैक्चर हो जाना कोई नई बात नहीं। आयु के इस दौर में आमतौर पर कंधों और कूल्हे की हडि्डयों में परेशानी होना स्वभाविक है। ऐसे में फ्रैक्चर की आशंका लगी ही रहती ही है। लेकिन इससे बचने के लिए अगर आप समय रहते ही अपनी जीवनशैली में योग व व्यायाम को जगह दे देगें, तो कुछ बात बने। ऐसा करने से आपकी हडि्डयों में शक्ति का संचार होता रहेगा।

सांकेतिक चित्र

अस्टियोपोरोसिस क्या है?

दरअसल, अस्टियोपोरोसिस हडि्डयों की वो परिस्थिति है। जिसमें: बढ़ती उम्र के साथ हडि्डयों का कमजोर होना। छोटी सी चोट का भी असहनीय होना। हडि्डयों का आसानी से टूट जाना।
अस्टियोपोरोसिस के अधिकतर मामलों में ऐसा देखा गया है कि इस अवस्था में ज्यादातर फ्रैक्चर रीढ़ की हड्डी या फिर कूल्हे की हड्डी में होता है। यहां तक कि कभी-कभी तो रीढ़ की हडि्डयों में बौनापन भी देखा गया है। सामान्य तौर पर यह परेशानी पुरुष व महिला दोनों में देखी जाती है। लेकिन 50 वर्ष या 50 से अधिक वर्ष की महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है। वहीं 70 की उम्र के बाद कूल्हे की हड्डी टूटने का खतरा दिनोंदिन बढ़ता चला जाता है।

सांकेतिक चित्र (रीढ़ की हड्डी का कमजोर होना)

कैसे बढ़ता है खतरा?

– शराब व धूम्रपान करने से परेशानी ज्यादा हो जाती है।
– कैल्शियम की कमी होना भी नुकसानदेह है।

सांकेतिक चित्र (कूल्हे की हड्डी का फ्रैक्चर)

क्या है उपाय?

इस समस्या से बचने के लिए संतुलित खानपान व व्यायाम करना जरूरी हो जाता है। बचपन से किशोरावस्था तक हमारी हडि्डयों का निर्माण होता है और तभी ये विकसित होती हैं। किशोरावस्था के बाद हडि्डयों की मरम्मत होनी शुरू हो जाती है। यदि इस दौर में आपके शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। तो शरीर उसे आपकी हडि्डयों से लेना शुरू कर देता है। ऐसे में शरीर में कैल्शियम की मात्रा का संतुलन बनाये रखना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। साथ ही सुबह-शाम टहलने से भी हडि्डयों में शक्ति का संचार होता रहेगा।

By: Vanshika Saini

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