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टिड्डी दल के हमले से कई जिलों में अलर्ट जारी

सांकेतिक चित्र

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दुनिया भर में कोरोना के आतंक, मजदूरों की  मजबूरी, कर्नाटक के तूफान के बाद अब देश भर में टिड्डी दल का हमला बढ़ रहा हैं। वर्ष 2020 एक से एक चुनौतियों और आपादाओं के साथ आगे बढ़ता चला जा रहा है।
आम आदमी से लेकर खास आदमी तक हर कोई बस इस आस में है कि शायद आने वाले दिन अपने साथ कुछ अच्छा व सकारात्मक लाएं। लेकिन 2020 का कहर कुछ कम होता नज़र नहीं आता। टिड्डी दल का संकट अब देश की राजधानी तक पहुंच चुका है।  इस कारण अब कई राज्यों और जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।

कीटों की भारी संख्या

किसान पहले ही इस लॉकडॉउन के चलते काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मज़दूर लोगों के लिए ये पहले ही अभिशाप साबित हो चुका है। उस पर टिड्डियों के हमले की मार के बाद किसान के पास कोई और चारा नहीं रह जायेगा। सारी फसल बर्बाद हो जायेगी। ऐसे में अनाज और फल-सब्जियों का संकट खड़ा हो जाएगा।

– सबसे पहले चपेट में आया आगरा
टिड्डी दल की आफत ने सबसे पहले आगरा को अपनी चपेट में ले लिया है। सप्ताह भर से टिड्डियों के दल ने आतंक मचाया हुआ है। आगरा जिले में टिड्डी दल का खतरा अभी टला नहीं है। कहर इस कदर है कि टिड्डियों के दो दल मध्यप्रदेश और राजस्थान में ठहरने के बाद आगरा से होते हुए अब यह दल हिंडोन तक आ पहुंचा है। टिड्डी दल का खतरा जगनेर, किरावली,धौलपुर और फतेहपुर सीकरी सहित कई जिलों में मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये करोड़ों की संख्या में हैं, आसानी से दो किमी की लंबाई और चार किमी की चौड़ाई की जमीन को घेर लेते हैं।

सांकेतिक चित्र

– झांसी में भी मचाया आतंक

सप्ताह भर पहले टिड्डियों के दल ने यहां आतंक मचाया था।  पिछले सप्ताह के शुक्रवार की बात करें, तो पहला टिड्डी दल मध्य प्रदेश से होते झांसी पहुंचा था।
रातभर, आजादपुरा में रूकने के बाद सुबह को ये दल बरुआसागर पहुंचा। जहां इन्होंने 7 से 8 गांवों के खेतों में भारी तबाही मचाई। वहीं दूसरे दल ने दो दिन बाद झांसी में फिर से अटैक कर दिया। राहत की बात यह रहीं कि यहां के किसानों ने रात में इन कीटों पर रसायन का छिड़काव किया। जिससे करीब 40 से 50 लाख कीट मारे गए। वहीं जीवित कीटों ने मध्य प्रदेश के छतरपुर की ओर उड़ान भर दीं।

– अब उत्तर प्रदेश पर निशाना
झांसी और आगरा के बाद उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में टिड्डी दल के हमले की आशंका जताई जा रही है। कीटों का सफरनामा हवा पर निर्भर करता है।
हालांकि, अभी तक दल के राजस्थान के आसपास वाले इलाकों में ही रुकने की आशंका जताई जा रही हैं। लेकिन अगर हवा का रुख बदला तो कुछ भी हो सकता है। हवा पुरवा हुई तो ये दल इटावा के जशवन्तनगर क्षेत्र की ओर बढ़ेगा। वहीं अगर हवा पछुआ ही रही तो भरतपुर से ग्वालियर, भिंड होते हुए फिर से झांसी पहुंच जाएगा।
बीते मंगलवार को लगभग तीन किलोमीटर लंबे टिड्डी दल ने एक बार फिर से झांसी आने की आशंका जताई थी। लेकिन हवा के चलते अचानक इन कीटों ने राजस्थान की ओर रुख कर लिया।
हवा के रुख के साथ टिड्डियों का दल ना जाने किस प्रदेश, किस शहर और किस गांव को अपना शिकार बनायेगा, ये कहना अभी कठिन है।

कीटों का काफ़िला

– किसानों की समस्या
चूंकि, ये कीट ढाई इंच लंबे हैं। इसीलिए हरी पत्तियों वाली फसल को कुछ पल में खाकर नष्ट कर देते हैं।

– किसानों ने क्या-क्या बचाव किये
जलापूर्ति वाले स्थानों पर कड़ी निगरानी रखी।
कीटों को भगाने के लिए तेज आवाज में शोर किया गया।
कीटों पर रसायन का छिड़काव किया गया।
किसानों ने धुआं किया।

Written by: Vanshika Saini
YUVA BHARAT SAMACHAR

 

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