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इस गांव में महीनों तक सोते हैं लोग…विज्ञान भी हैरान

Pooja cloths house

रामायण की गाथाएं गुजरे हजारों साल हो गए हैं, लेकिन आज भी रामायण के चर्चित पात्रों में से रावण का भाई कुंभकर्ण सुर्खियों में रहता ही है फिर चाहे किसी की उपमा करने के रूप में या फिर किसी पर तंज कसने के रूप में । लंकाधिपति के छोटे भाई कुंभकर्ण के बारे में कहा जाता था कि वह वर्ष के 6 महीने सोता था और 6 महीने जागता था।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस युग में भी कुंभकर्ण जैसे कुछ लोग हैं जो महीनों तक सोते रहते हैं। जिनके बारे में बहुत कम लोगों को खबर है। हालांकि इस बात पर यकीन करना कुछ मुश्किल है परंतु यह बात बिल्कुल सच ही है।
बता दें कि कजाकिस्तान के एक गांव में लोग महीनों-महीनों तक सोते रहते हैं। लेकिन कोई ये नहीं जानता कि-
आखिर इसका कारण क्या हो सकता है?
कौन-सा ऐसा गांव है जहां लोग ऐसे सोते है?

दरअसल, यह मामला कजाकिस्‍तान के एक छोटे से गांव कलाची का है। यहां की कहानी बेहद अजीबो गरीब है। इस गांव के लोग जब सोते हैं तो कम से कम एक महीने से पहले नहीं जागते। ऐसा भी माना जाता है कि अगर यहां का कोई भी शख्‍स कभी भी सो गया तो फिर वह ए‍क महीने से पहले नहीं उठता है। बता दें कि इस गांव को ‘स्‍लीपी हॉलो’ कहते हैं। और यहां के अधिकांश लोग सोते हुए ही नजर आते हैं।

आखिर इस गांव में ऐसा क्‍यों होता है?
इस बारे में कई बार शोध किया जा चुका हैं, लेकिन आज तक कोई भी कोई पुख्‍ता प्रमाण कोई नहीं दे पाया है। लेकिन ऐसा बताया जाता है कि इस गांव में यूरेनियम की एक काफी समय पुरानी खान से जहरीली गैस के निकलने से ऐसा होता है। जिससे लोग महीनों तक सोते रहते हैं। चूंकि, इस खदान का सालों से इस्‍तेमाल नहीं हुआ है। इस वजह से यहां का पानी भी दूषित पाया जाता है। इसके प्रभाव से जो व्‍यक्ति एक बार सोता है वह कई महीनों तक सोया रह जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां के पानी में कार्बन मोनाक्‍साइड गैस है। जिसकी वजह से ही इस गांव की ऐसी स्थिति मानी जाती है।

याददाश्त् पर पड़ता है फर्क

कलाची के लोगों को एक बार नींद में जाने के बाद कुछ भी याद रखना मुश्किल रहता है। वैसे तो इस गांव की आबादी मात्र 600 लोगों की हैं। जिसमें से 14 फीसदी लोगों को यह नींद की बीमारी हैं। ये लोग खुद नहीं जानते कि आखिर ऐसा क्‍यों होता है?। नींद में जाने के बाद इन्‍हें कुछ भी होश नहीं रहता है और न ही कुछ भी याद रहता है। जब इन्‍हें दूसरे लोग बताते हैं तो यह बात समझ में आती है कि वे नींद से जगे हैं।
इस बीमारी की एक ओर ख़ास बात है कि जिन लोगों को सोने की बीमारी लग जाती है वे लोग कभी भी कहीं भी सो जाते हैं। यहां तक कि चलते-चलते सड़क पर ही गिर जाते हैं और सो जाते हैं। लोगों का ऐसा कहना है कि उन्‍हें नीदं का एहसास नहीं होता है और कुछ समय के लिए वह सपनों की दुनिया में भी चले जाते हैं।
दरअसल, इस बीमारी से जुड़ा पहला मामला 2010 में सामने आया था। एक स्‍कूल के कुछ छात्र अचानक से सो गए। उस वक्‍त स्‍कूल प्रबंधन ने छात्रों को जगाने की काफी कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसके बाद से यह नींद का सिलसिला जारी है और लोगों को यह बीमारी होती गई।

Written by: Annu Choubey

YUVA BHARAT SAMACHAR
MahaLaxmi group of institution
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