"> ');
Home » कविता के माध्यम से बताई…पिता के संघर्ष की कहानी
अन्य

कविता के माध्यम से बताई…पिता के संघर्ष की कहानी

Pooja cloths house

क्योंकि पिता है वो रोता है चुपके से…

अन्नू चौबे

मुसीबतों को बचपन से ही देखा
फ़िर भी हर हालातों में मुस्कुरा देता।
रास्ते का हर काँटा उसके पैरों में चुभा
फ़िर भी कंधे पर बोझ लेकर वो घूमा।
कहता नहीं वो कभी किसी से
क्योंकि पिता है वो रोता है चुपके से…
नाखुश देख अपने बच्चों को
कोसता है अपने उस बचपन को,
जब उठाना था बस्ता और बोतल
तब बना खड़ा किया किसी और का महल,
कहता नहीं कभी किसी से,
क्योंकि पिता है वो रोता है चुपके से…
रास्तों के भीड़ में उंगली थाम रखी थी
सिर पर चोट लगने के बावजूद भी रोज काम पर जाता।
एक वक़्त का खाना खाकर
मिलों दूर पैदल चला जाता।
कहता नहीं कभी किसी से
क्योंकि पिता है वो रोता है चुपके से…
वक़्त ने दर बदर करवट बदली
फ़िर भी देख जरा उसे, परिवार के लिए खड़ा हुआ।
उन हालातों का भी क्या कसूर
जब अपनें ही परिवार ने कर दिया ख़ुद से दूर,
कहता नहीं कभी किसी से
क्योंकि पिता है वो रोता है चुपके से…
खुद को कामों में उलझा रखा था उसने
क्योंकि उसकी बेटी पराई हो रही थी सामने।
कामों का सारा बोझ रख रखा था खुद पर
दूर खड़ा परिवार उसका हस रहा था उस पर,
कहता नहीं कभी किसी से
क्योंकि पिता है वो रोता है चुपके से…
एक गलती हो गई थी उस पिता से
एक बेटी का पिता था वो,
जो रोता था कभी चुपके से
आज वो रो दिया है पूरे समाज में,
जिन आंखों में कभी आंसू नहीं देखा
उनको भीगते देख, रोया परिवार भी,
क्या एक बेटी का पिता होना इतना गलत है
कि पिता के संघर्ष का अंतिम झोर ही नहीं दिखता।
– अन्नू चौबे
छात्रा, सुभारती विवि, मेरठ।

आप भी अपनी कोई भी स्वंयरचित व अप्रकाशित रचना हमें फोटो और नाम के साथ enquiry@eyuvabharat.com पर भेज सकते हैं।

MahaLaxmi group of institution
MahaLaxmi group of institution