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धार्मिक

श्री कृष्णजन्माष्टी: व्रत, मुहूर्त और पूजा-विधि

राधे राधे

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी इस बार 12 अगस्त को मनाई जाएगी। श्री कृष्णजन्म पर पूरे देश में व्रत और पूजन किया जाता है। सभी लोग बड़ी श्रृद्धा और भक्ति के साथ भगवना कृष्ण का जन्मदिन मनाते है। सबसे ज्यादा धूम मथुरा, वृन्दावन और बरसाने में रहती है। इस दिन लोग श्री ठाकुर जी महाराज को स्नान कराकर सुंदर वस्त्र पहनाते है और पूरे दिन भजन करते हुए रात को 12 बजे व्रत को खोलते हैं। आइए हम आपको श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन का मुहूर्त और व्रत के बारे में बताते हैं।

पूजा मुहूर्त

इस दिन पूजा करने का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट है। वहीं जन्माष्टमी के दिन दोपहर 12:27 बजे से 02:06 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस बार जन्माष्टमी पर कृतिका नक्षत्र रहेगा, उसके बाद रोहिणी नक्षत्र रहेगा, जो 13 अगस्त तक रहेगा।

जन्माष्टमी की पूजा-विधि
सबसे पहले जल्दी उठकर स्नान आदि से निपट कर मंदिर जाए। बाद में घर में पूजा स्थान की साफ-सफाई करके साज-सजावट करें। उसके बाद लड्डू गोपाल को पंचअमृत से स्नान कराए। उसके बाद भगवान की परिवार सहित आरती करें और उन्हें जन्मदिवस की बधाई दें। साथ ही शालिग्राम जी को भी स्नान कराए और पूजन आदि करें।
श्री कृष्ण ऐसे लगांए भोग
भोग के लिए मेवा, मिश्री, किशमिश, मखाने और काजू आदि से पंचमेवा का भोग बनाएं और बड़े प्रेम के साथ अपने कान्हा को भोग लगाए।
भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी जी अति प्रिय है इसलिए पंचअमृत में तुलसी डालकर भी भोग के लिए रखे। धनिए की पंजीरी बनाकर भोग तैयार करें। लड्डू गोपाल को माखन सबसे ज्यादा पसंद इसलिए भोग में माखन भी जरूर रखें।
जन्माष्टमी के दिन दान करने से भी विशेष फल मिलता है। इसलिए इस दिन गरीबों को भोजन खिलाएं और हां, उन्हें वस्त्र भी जरूर दें। साथ ही इस राधे-राधे जपते रहे। भगवान आपकी हर विपता को हर लेंगे और आपके सभी मनोरथ पूर्ण करेंगे।
Written by: POOJA SAHANIYA

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