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यहां पर किया था विक्रमादित्या सहित मुगलों ने कई वर्षों तक राज

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मिर्जापुर के चुनार में स्थित चुनार किला कैमूर पर्वत की उत्तरी दिशा में स्थित है। यह गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर बसा है। बता दें कि यह किला एक समय में हिंदू शक्ति का केंद्र था। हिंदू काल के भवनों के अवशेष अभी तक इस किले में हैं, जिनमें महत्वपूर्ण चित्र अंकित हैं। इस किले में आदि-विक्रमादित्य का बनवाया हुआ भतृहरि मंदिर है, जिसमें विक्रमादित्य की समाधि भी है। साथ ही इस किले में मुगलों के मकबरे भी हैं।
बता दें कि ये वही चुनारगढ़ का किला है जिसपर देवकीनंदन खत्री नें मशहूर उपन्यास चंद्रकांता लिखा था। वैसे तो ये किला हमेशा से ही अपने रहस्य और तिलिस्म के लिये मशहूर रहा है। अगर इस किले के इतिहास पर नजर डालें तो मिर्जापुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित इस किलें का निर्माण 56 ईसा पूर्व में उज्जैन के तत्कालीन महाराज विक्रमादित्य नें करवाया था।


कई राजाओं और सम्राटों के शौर्य का गवाह बना यह किला कालांतर में मुग़ल शासक बाबर के अधीन आ गया था। 1531 ई. में यह किला हुमायूं के हाथ से निकल कर शेरशाह सूरी के हाथों में आ गया। लेकिन शेरशाह सूरी के मरने के बाद एक बार फिर से 1574 ई. में यह किला मुग़ल शासक अकबर के कब्जें में आ गया। तब इस किलें को बिहार और बंगाल का गेट माना जाता था। तब से लेकर 1772 ई. तक चुनार किला मुग़ल सल्तनत के अधीन रहा। जिसके बाद मुगलों से ईस्ट इण्डिया कंपनी ने यह किला जीता लिया, उसके बाद से इस किले पर अग्रेंजो का कब्ज़ा हो गया।

18 अप्रैल सन् 1924 को मिर्जापुर के तत्कालीन कलेक्टर द्वारा दुर्ग पर लगाये एक शिलापत्र पर उत्कीर्ण जानकारी के हिसाब से उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के बाद इस किले पर –
1141 से 1191 ई.- पृथ्वीराज चौहान
1198 में- शहाबुद्दीन गौरी
1333 में- स्वामीराज
1445 में- जौनपुर के मुहम्मद शाह शरकी
1512 में- सिकन्दर शाह लोदी
1529 में- बाबर
1530 में- शेर शाह सुरी
1536 में- हुमायूं आदि शासकों का शासन रहा है।

मौत का कुंआ

बता दें कि शेरशाह सूरी से हुए युद्ध में हुमायूं ने इसी किले में शरण ली थीं। इस प्रसिद्ध चुनार के किले का पुर्ननिर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था। इस किले के चारों ओर ऊंची-ऊंची दीवारें है। यहां से सूर्यास्त का नजारा देखना बहुत मनमोहक होता है। कहा जाता है कि एक बार इस किले पर अकबर ने कब्‍जा कर लिया था। उस समय यह किला अवध के नवाबों के अधीन था। किले में सोनवा मण्डप, सूर्य धूपघड़ी और विशाल कुंआ (मौत का कुंआ)  भी मौजूद हैं।
आप भी जब कभी भी मिर्जापुर जायें तो चुनार किला देखना ना भूलें। आपको यहां इतिहास से रू ब रू होने का भरपूर मौका मिलेगा।

Written by: Anju Yadav

YUVA BHARAT SAMACHAR

 

MahaLaxmi group of institution
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