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लहरों का कोलाहल और साहिल की शांति…कसोल


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हिमाचल प्रदेश की जान कसोल… पार्वती नदी का किनारा, हिलोरे मारती चंचल पार्वती, शांति की सरगम में बसा ये हिल स्टेशन मिनी इजराइल के नाम से मशहूर है। यहां जो भी आता है बस यहीं का होकर रह जाता है। भीड़भाड़ से कोसों दूर ये स्थान ट्रेकिंग के लिए एक उम्दा स्पोट है। आइये, जानते है कसोल के बारे में… घूमाते है आपको मिनी इजराइल में….
आमतौर पर हर कोई यही सोचता है कि सच में कितने लक्की होते है वो लोग जो नदी के किनारे रहा करते हैं, ना कोई बोरियत, ना कोई रोमांच की कमी। जब मन किया तभी चल दिए नदी के किनारे, बैठ गए घंटों, फेंकने लगे कंकड़ और देखने लगे जलतरंगों को… जी, बिल्कुल इस गाने की तरह जिसके बोल कुछ ये है कि, ठहरे हुए पानी में… कंकर ना मार सांवरी, मन में हलचल सी मच जायेगी सांवरी…. ठहरे हुए पानी में… ऐसी ही हैप्पनिंग सी प्लेस है कसोल, जहां हो जाते दूर मन के शोर।

– कोलाहल है या शांति…
रात भर के सफर के बाद मैं और मेरे भाई जयश गुप्ता और हिमांशु मित्तल कसौल की घाटी में पहुंचें। पहली हवा का झोंका, नदी का कोलाहल बखूबी अपना परिचय खुद ब खुद दे रहा था। सच में कितनी रूहानी हवा थी वहां की, जो दिल में उतर कर एक अलग सा हसीन माहौल बना रही थीं। बड़े-बड़े साहिलों के बीच ठंडी-ठंडी पुरवाई, उस पर लहरों के किनारे हमारा टूरिस्ट कैम्प चार चांद जैसा ही काम करता था।
कैंप से बाहर निकलते ही सामने हिलोरे मारती नदी ना जाने कौन सी सरगम गाती थी। इस दौरान नदी के किनारे बैठ उससे रू ब रू होने का मौका मिला। तब जाकर महसूस हुआ कि नदियां जितनी शांत होती है, उतनी ही उग्र भी होती है। सच बताऊं तो ध्यान से सुनने पर लगता है मानो नदियां आपसे गुफ्तगू कर रही हो। और अपनी तमाम अनकही बातें कहूं या शिकायतें बेरोक बयां कर रही हो। शांति में लिपटी पार्वती की उग्रता एक अलग ही सुकून प्रदान करती थी।


हम तीनों नदी की खामोशी को सुन भी रहे थें और महसूस भी कर रहे थें। नदी किनारे हम तीनों भाई एक चट्टान पर बैठे थें और बाकि के लोगों को स्टिक लेकर चलते हुए देख रहे थे, जो वहीं पास में ट्रेकिंग के लिए जा रहे थे। हम लोगों ने भी इसका लुत्फ बखूबी उठाया। वाकई, इसका भी अपना एक अलग आनंद होता है। वैसे तो, यहां पर आने वाले ज्यादातर लोग कैम्प में ही रुकना पसंद करते हैं। या फिर नदी के किनारे होमस्टे करते है।

– क्यों कहा जाता है मिनी इजराइल…
मिनी इजराइल यानि कसोल की रौनक देखते ही बनती है। कैम्प में कुछ देर रूकने के बाद हम निकल पड़े इजराइल का सैर सपाटा करने। आसपास के बाजारों में इजरायली पर्यटकों का तांता लगा हुआ था। उनका रहन-सहन, संस्कृति और खानपान का जायजा लेते हुए हम आगे बढ़े। यहां के लोगों ने इजराइल की सभ्यता को जिस तरह से स्वीकारा है, इस बात की गवाही देता कसोल, जो मिनी इजराइल के नाम से जाना जाता है।
यहां का मून डांस कैफे, बुद्धा पैलेस, स्टोर गार्डन जैसे कुछ कैफे काफी अच्छे है। यहां पर आप कॉन्टिनेंटल फूड का स्वाद ले पायेंगे। अगर आप शाकाहारी है तो हो सकता है कि आपको यहां थोडी कठिनाई हो सकती है। चूंकि, हम तीनों भी शाकाहारी ही थे इसीलिए इस परेशानी का सामना हमें भी करना पड़ा। लेकिन वो कहते है ना कि ढूंढने से तो भगवान भी मिल जाया करते हैं वैसे ही हमें भी शाकाहारी भोजन यहां मिल ही गया।

– कसोल के बाजारों की क्या बात…
कसोल के बाजारों का मुकाबला शायद ही कहीं हो, यहां के स्थानीय बाजार में ऊन से बनी चीजें देखने को मिल रही थी। एक से एक लकड़ी का सामान और एक से एक हेंडमेड चीजें अपनी खूबसूरती का गान बखूबी कर रही थी।
मिनी इजराइल के पास ही मणिकर्ण और खीरगंगा भी काफी प्रसिद्ध जगह है। मणिकर्ण  को देखकर एक ओर हैरानी होती है तो दूसरी ओर इस जगह की सुदंरता मन को मोह लेती है। मणिकर्ण  ऐसी जगह जहां दो धर्मों का संगम देखने को मिलता है। पार्वती नदी के किनारे एक ओर शिव मंदिर है तो दूसरी ओर गुरु नानक देव का ऐतहासिक गुरुद्वारा।

वहां घूमकर पता चला कि दरअसल, इस स्थान पर  भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपना तीसरा नेत्र खोला था। और तीसरा नेत्र खुलते ही उनके नेत्रों से नैना देवी प्रकट हुईं। इसी कारण यह जगह नैना देवी की जन्म भूमि के नाम से प्रसिद्ध है। मैं सोचता हूं कि मणिकर्ण साहिब के गर्म झरने, धार्मिक प्रवृत्तियां और खूबसूरत वातावरण ने हमारे साथ न जाने कितने लोगों को हैरत मेें डाला होगा।

मालाना ट्रेक

दो दिन और तीन रात कसोल को जीने के बाद ना चाहते हुए भी घर लौटना पड़ा। सुबह को नींद से जगाती हिब्रू भाषा में विदेशी शास्त्रीय संगीत की धुन आज भी मेरी सुबह को सुहाना कर देती है। वैसे तो भाईयों के साथ बिताया हुआ समय प्यार और तकरार से भरा होता है। लेकिन ये बात भी सच है कि हम मस्ती भी इन्हीं के साथ ही होती है। वहां बिताया हुआ समय वाकई  बेहतरीन और यादगार था।  कसोल के बर्फीले पहाड़ों से टकराकर आती हवा इसे और भी यादगार बनाती है।

 

आप भी एक बार मिनी इजराइल घूमकर आयें… यकीनन, ये आपको रोमांच से रू ब रू करायेगा।

Written by: Rahul Singhal
YUVA BHARAT SAMACHAR

 

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