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धार्मिक

क्यों रंगे है गिरधारी नीले रंग में, जाने क्या है राज़

राधे-राधे

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जब जब बंशीधर का नाम लेते है तो हमारे आंखों के सामने एक नीले रंग की छवि बनती है, क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर बांके बिहारी बाकि भगवानों की तरह क्यों नहीं दिखाई पड़ते। यदि नहीं , तो आइए हम आपको बताते हैं…
दरअसल, नीला रंग शांति एवं स्थिरता के साथ साथ विशाल चरित्र का प्रतीक होता है और श्री कृष्ण इन सभी गुणों से विद्यमान हैं। जैसे समुंद्र, आकाश एवं झरने नीले रंग के और बहुत विशाल होते है, ठीक उसी तरह श्री कृष्ण भी विशाल और अपरिभाषित है। मूल के अनुसार, संस्कृत शब्द ‘कृष्ण’ का अर्थ कला व गहरा होता है, हमने देखा और सुना भी है कि इसे सभी आकर्षक के रूप परिभाषित करते है

नीले रंग की धर्मिक व्याख्या
वेदों के अनुसार, भगवान कृष्ण गहरे काले रंग के द्रविड़ देवता है। हिन्दू धर्म कहता है नीला रंग अनंत और असीम का प्रतीक है। जबकि वेद पुराणों में कहा गया है, जब जब धरती पर अधर्म बढ़ा है तब तब भगवान विष्णु ने मानव अवतार लिया है और धरती का उधार किया है। अब तक भगवान विष्णु ने 23 अवतार लिए हैं जिसमें से कृष्ण अवतार 8वां अवतार कहलाता है। वैसे तो किसी ने भगवान को साक्षात रूप में नहीं देखा। लेकिन हिन्दू धर्म में लोग मूर्ति पूजा को मानते हैं, इसलिए भक्तों ने भगवान को अपने मन में बसे स्वरुप के अनुसार ही मूर्तिरूप में ढाल लिया है।

क्या कहती है पौराणिक कथाएं
आपके मन में कई बार सवाल आते होंगे आखिर क्यों श्री कृष्ण को नीला प्रदर्शित किया जाता है। क्योंकि भगवान विष्णु सागर में निवास करते हैं इसलिए विष्णु सागर का नीला रंग सव्य धारण कर लेते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि पूतना के विषयुक्त दूध के कारण ऐसा हुआ। वहीं दूसरी और ये भी उल्लेखित है कि यमुना नदी के कालिया नाग से दो-चार करने के बाद ऐसा हुआ।
हमें भी माखनलाल से ये सीखना चाहिए कि हमें भी अपने आप को सागर के व्यवहार को खुद में ढालना चाहिए। जिस तरह सागर हर चीज़ को अपने में घोलकर भी अपना अस्तित्व बनाए रखता है, उसी तरह हमें भी खुद के अस्तित्व को घोलके भी हमेशा अपनी अच्छाईयों को बरकरार रखना चाहिए।

Written by: Neha Pathak

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