"> ');
Home » श्रीमद्भागवत से सीखें आदर्श जीवन जीने का सार
धार्मिक

श्रीमद्भागवत से सीखें आदर्श जीवन जीने का सार


Pooja cloths house

कुल 18 अध्याय और 700 श्लोकों में लिखा श्रीमद्भागवत गीता न केवल धर्म का उपदेश देती है, बल्कि एक सम्पूर्ण रूप से जीवन जीने की कला भी सिखाती है। भारतीय परम्परा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो उपनिषद् और धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों को गौ और गीता को उसका दुग्ध कहा गया है। इसका मतलब यह है कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या थी, उसको गीता सर्वांश में स्वीकार करती है। उपनिषदों की अनेक विद्याएँ हमें गीता में देखने को मिलती हैं।

महाभारत के पहले अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद लोगों के लिए प्रेरणा में स्त्रोत हैं। गीता के हर एक उपदेशों पर चलकर हम केवल स्वयं का ही नहीं, बल्कि समाज का कल्याण भी कर सकते हैं। विपिन शास्त्री का मानना हैं कि महाभारत के युद्ध के दौरान जब पांडवों और कौरवों की सेना आमने-सामने हुई तो अर्जुन अपने बंधुओं को देखकर विचलित हो जाया करते थे। तब उनके रथ के सारथी बने श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देते हैं। ऐसे ही हम आज के वर्तमान जीवन में उत्पन्न कठिनाईयों से लडऩे के लिए गीता में बताए गए हर ज्ञान को अच्छी तरह से अनुसरण करना चाहिए। आइए जानते है श्रीमद्भगवद्गीता के किन किन उपदेशों का पालन करके हम अपने जीवन के कठिनाइयो से लड़ सकते हैं और अपने जीवन को सफल बना सकते है।
1. गुस्से से दूरी जरुरी
गीता में कहा गया है कि क्रोध से अधिक भ्रम पैदा होते है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र हो जाती है। जब बुद्धि व्यग्र हो जाती है तब तर्क नष्ट हो जाते हैं और जब तर्क नष्ट होते हैं तो व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है।
2. दृष्टिकोण एक अहम हिस्सा
जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को हमेशा एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही मायेने में सही है। इससे वह अपने मनचाहे फल की भी प्राप्ति कर सकता है।
3. नियंत्रित मन
हमें हर वक़्त अपने मन पर नियंत्रण करना बेहद आवश्यक होता है। जो व्यक्ति मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते, उनका मन उनके लिए एक प्रकार से शत्रु का कार्य करता है।
4. करें अंतर्दर्शन
व्यक्ति को आत्मपरीक्षण करना चाहिए। आत्म ज्ञान की तलवार से व्यक्ति अपने अंदर के अज्ञान को काट सकता है। जिससे उत्कर्ष की ओर प्राप्त होता है।
5. सकारात्मक सोच
मुनष्य जिस तरह की सोच रखता है, वह वैसे ही आचरण करता है। मनुष्य को अपने अंदर के विश्वास को जगाकर अपने सोच में वह स्वयं परिवर्तन ला सकता है। जो एक मनुष्य के लिए काल्याणकारी होगा।
6. जैसी करनी वैसी भरनी
गीता में भगवान कहते हैं मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे वैसे ही फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सदकर्मों को महत्व देना चाहिए।
7. शांत चित्त बनाये काम
मनुष्य का मन चंचल होता है, वह इधर उधर भटकता रहता है। लेकिन अशांत मन को अभ्यास से वश में किया जा सकता है।
8. सफल बनें
मनुष्य जो चाहे प्राप्त कर सकता है, यदि वह विश्वास के साथ किसी भी काम पर लगातार चिंतन करे तो उसे सफलता प्राप्त होती है।

Written by: Annu Choubey

YUVA BHARAT SAMACHAR

We are hiring

Suraj mobile center

Suraj mobile center