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धार्मिक

गणेश चतुर्थी की पूजा-विधि, कैस करें गणपति को खुश

LORD GANESH
Pooja cloths house

गणेश उत्सव भारत देश का एक ऐसा त्योहार है, जो हर साल पूरे देश में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जोता है। गणेश उत्सव,जो कई जगह गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है लगभग 11 दिनों तक चलता है। भारत में गणेश उत्सव को श्री गणेश जयंती के रूप में मनाया जाता है। 2020 में इतने महीनों के मुश्किल हालातों से झूझने के बाद अब आखिरकार देश में त्योहारों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। गणेश उत्सव  22 अगस्त यानि आज से शुरू हो रहा है।LORD GANESH

यूं तो हर साल इस त्योहार की रौनक पूरे देश में देखने लायक होती है। पूरे 11 दिन लोग दिल खोलकर ढोल-नगाड़ो के साथ बप्पा का अपने घरों में स्वागत करते हैं, उनकी पूजा-अर्चना करते है। जगह-जगह पंडाल लगाए जाते हैं, जहां की रौनक देखते ही बनती है। इन 11 दिनों में देश की सूरत ही बदली नज़र आती है, हर तरफ ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बेहद सुंदर पंडालो का मेला नज़र आता है। लेकिन निराशा की बात ये है, कि इस साल ऐसा माहौल देखने को नही मिलेगा। कोरोना काल की वजह से सार्वजनिक जगहों पर पंडाल लगाने की अनुमति नहीं है, इसलिए इस साल श्रद्धालु गणेश उत्सव अपने-अपने घरों में ही मनाएंगे। प्रत्येक चंद्र महीने में 2 चतुर्थी तिथियां होती हैं। चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश से संबंधित होती है। शुक्ल पक्ष के दौरान अमावस के बाद वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। वहीं कृष्ण पक्ष के दौरान पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

आपको बता दें, कि भाद्रपद के दौरान विनायक चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।LORD GANESH

साल 2020 का गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त:

इस साल ये पावन तिथि शुक्रवार 21 अगस्त 2020 रात्रि 11:02 बजे से प्रारंभ होकर, शनिवार 22 अगस्त 2020 को शाम 7.57 बजे तक रहेगी।

गणेश चतुर्थी व्रत की विधि:

भारतीय संस्कृति में इस व्रत की अत्यंत महत्वता है। महिलाएं इस व्रत को बहुत ही श्रद्धा और निष्ठा के साथ करती हैं और भगवान गणेश जी से आशीर्वाद प्राप्त करतीं हैं। चलिए आपको भी बताते है इस व्रत को करने की विधि।

सबसे पहले एक ईशान कोण में स्वच्छ जगह पर रंगोली डाली जाती है। इसे विधि को चौक पुरना कहते हैं।

उसके उपर आटा अथवा चौकी रखकर, उसपर लाल या पीला वस्त्र बिछाते हैं।

इसके साथ एक पान पर सवा रूपेया रख कर पूजा की सुपारी रखी जाती है। साथ ही उस जगह पर एक कलश की भी स्थापना की जाती है। इसके बाद कलश के उपर पूजा का नारियल रखा जाता है। कलश पर मौली बांधी जाती है।

स्थापना के दिन सबसे पहले कलश की पूजा की जाती है। जल, कुमकुम व तावल चढ़ाकर पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

कलश के बाद गणपति जी की पूजा की जाती है। उन्हें भी जल चढ़ाकर वस्त्र पहनाए जाते हैं। उसके पश्चात कुमकुम और चावल चढ़ाकर पुष्प समर्पित करते हैं। गणेश जी को मुख्य रूप से दूर्वा चढ़ाई जाती है।

इसके बाद बप्पा को उनकी मनपसंद मिठाई मोदक का भोग लगाया जाता है। इसके पश्चात परिवार के साथ आरती की जाती है। और अंत में सभी को प्रसाद बांटा जाता है। यह कलश पूरे 11 दिन ऐसे ही रखा जाता है। और 11वें दिन कलश पर रखे नारियल को फोड़कर प्रसाद खाया जाता है।

आपको बता दें की गणेश जी की उपासना में गणेश अथर्वशीर्ष का बहुत अधिक महत्व है। इसे रोज़ाना पढ़ा जाता है। इससे गणेश जी का आशीर्वाद तो प्राप्त होता ही है, साथ ही बुद्धि का विकास भी होता है। यह मुख्य रूप से एक शांति पाठ है।

Written by: ANKITA BAKODIA

YUVA BHARAT SAMACHAR
MahaLaxmi group of institution
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