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World coconut day पर जाने कुछ रोचक बातें

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इस चिलचिलाती गर्मी में लोगों को सबसे ज्यादा नारियल के पानी की आवश्यकता होती है। जो आसानी से हमें कहीं भी मिल जाता है। नारियल केवल हमारी प्यास को नहीं बुझाता बल्कि नारियल के तेल को भी कई जगह इस्तेमाल में लाया जाता है।
बात सिर में मालिश की हो या फटे होंठों पर लगाने की या फिर आपको खाना ही क्यों ना पकाना हो। नारियल के तेल की जगह  हर घर में रसोई से लेकर बाथरूम तक होती है। दक्षिण  और पश्चिम भारत में तो यह बहुत बड़ी जरूरत है। नारियल को आज सुपर फूड भी माना जाता है। हालांकि, जब पिछले दिनों हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि नारियल एक प्रकार का जहर है। उनके इस  रिसर्च पर ही सवाल खड़े हो गए। भारत जैसे देश में तो नारियल के तेल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है।
हार्वर्ड विश्विद्यालय के टी एच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एपिडेमोलॉजिस्ट करिन माइकल्स ने करीब तीन साल पहले नारियल तेल को ‘प्योर पॉयज़न’ बताया था। उन्होंने कहा कि यह एक प्रकार का जहर है। इसे खाने में बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। फिर उन्होंने कई जगह लेक्चर में इस दावे को बार-बार उठाया। दरअसल, ये पूरी रिसर्च सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड फैट की लड़ाई का हिस्सा है। जिसे हमें समझने की भी जरूरत है।
सैचुरेटेड फैट को लेकर नारियल के पक्ष-विपक्ष के तर्क में नारियल के तेल में सैच्युरेटेड फैट की काफी अधिक मात्रा होती है, ये खराब नहीं बल्कि अच्छी बात है। ये काफी हेल्दी है, तलने-भुनने के लिए नारियल के तेल को ही अच्छा माना जाता है। नारियल का तेल शरीर में उतनी आसानी से नहीं जमता जितना कि अन्य तेल। नारियल के तेल ज्यादातर ठंड के दिनों में जम जाया करते है। इसलिए खाने में इसका इस्तेमाल वजन कम करने के लिए किया जाता है।
नारियल तेल को खाने में शामिल करने के खिलाफ में चेतावनी जारी करते हुए ब्रिटिश न्यूट्रिशन फाउंडेशन ने कहा, ‘नारियल तेल को खाने में इस्तेमाल करना सेहत के लिए फायदेमंद है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।’ साथ ही ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की सीनियर डायटिशन विक्टोरिया टेलर कहती हैं, नारियल के तेल में 86 प्रतिशत सैच्युरेटेड फैट होता है जो मक्खन में मौजूद सैच्युरेटेड फैट से भी एक तिहाई ज्यादा ही है।
क्यों ये रिसर्च कमियों से भरपूर है?

ये पूरी रिसर्च सैचुरेटेड और अनसैचुरेटेड फैट की लड़ाई पर टिकी हुई है। जैसे देसी घी और महंगे रिफाइंड आयल की लड़ाई है। देसी घी में सैचुरेटेड फैट होते है और रिफाइंड में अनसैचुरेटेड, पश्चिमी सभ्यता या खानपान में सैचुरेटेड को नुकसानदेह माना जाता है। जबकि नारियल का तेल पूरे सैचुरेटेड फैट पर चल रहे कैंपेन का एक हिस्सा है।
भारत में तो देसी घी और नारियल का  एक जैसा ही है, क्योकि दोनों ही प्राकृतिक हैं।
Written by: Annu Choubey

YUVA BHARAT SAMACHAR

 

MahaLaxmi group of institution
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