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क्या आपने जाना काढ़े का हिसाब-किताब ?

सांकेतिक चित्र

Pooja cloths house

कोविड के इस माहौल में सभी लोग परहेज और दवाईयों से परेशान तो है ही, तो ऐसे में काढ़ा और हर्बल इम्युनिटी ड्रिंक जीवन शैली का एक बेहद महत्तवपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। लेकिन वो कहते है ना जनाब, अति तो हर चीज़ की बुरी होती है। इसीलिए हर चीज़ का संतुलन बनाएं रखना काफी जरूरी हो जाता है। तो आज हम जानेंगे कि आखिर कितनी मात्रा में हमें काढ़े का सेवन करना चाहिए।

आमतौर पर काढ़ा जड़ी-बूटियों और कुछ मसालों के एक निश्चित अनुपात का संयोजन होता है। इस पेय को बनाने के लिए अलग-अलग लोगों की कवायद भी अलग है। लोग इसको अनेक प्रकार से बना रहे हैं। ताकि वे इस महामारी से अपने आप का बचाव कर सकें। असल में काढ़ा पीने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाया जाता है। और इसको बनाना बेहद ही आसान होता है। आपको चाहिए बस कुछ घरेलु मसालें और कुछ जड़ी-बूटियां जो कि आसानी से पंसारी की दुकान पर मिल ही जाती है। जिनमें से मुख्य साम्रगी है –

सूखा अदरक, हल्दी, शहद, काली मिर्च, तुलसी, दालचीनी, जायफल एवं लौंग।

हाल तो जैसा कि पुराने समय से ही इस बात पर ज़ोर दिया जाता रहा है कि अति तो हर चीज़ की ही बुरी होती है। बिल्कुल वैसे ही काढ़े के अधिक सेवन से भी लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

तो क्या हैं असंतुलित काढ़े पीने के दुष्परिणाम, आइये जानते हैः

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अब क्योंकि काढ़े का तासीर गर्म होता है तो शरीर में कुछ गड़बड़ी होना लाजमी है जैसेः कब्ज होना, शरीर में गर्मी की वृद्धि होना, आंखों का पीला होना व मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होना, अम्लता, मुंह में छाले, नाक से खून आना और लीवर से संबंधित बीमारियां आदि शामिल हैं। हाल तो, भारत में घरेलू नुस्खों के बिना काम चलता ही नहीं है, क्योंकि ऐसा प्राचीनकाल से ही चला आ रहा है। और हमारी दादी व नानी के द्वारा ऐसे उपचारों को अपनाया भी गया है। जो कि काफी कारीगर भी देखा गया है। लेकिन आज की इस विकट स्थिति में हर कोई अपने आप और अपनों का बचाव चाहता है, जो कि स्वाभाविक है। लेकिन असामान्य व असंतुलित तरीके से किसी भी चीज़ का सेवन करना किसी मूर्खता से कम नहीं। इसका मतलब तो सीधे- सीधे वहीं हुआ ना कि दिन में एक सोने का अंड़ा देने वाली मुर्गी को सिर्फ़ एक दिन में सभी अड़ों की लालसा में हलाल कर देना। क्यों क्या कहते हो? इसीलिए, किसी भी चीज़ की अधिकता न करते हुए, सावधानी व विवेक से काम लें, क्योंकि हालात बदलने में थोड़ा वक्त तो लगता ही है। रातोंरात तो कुछ नहीं हो सकता।

कितनी हो काढ़े की मात्रा

  • आप दिन में एक छोटे कप से ज्यादा काढ़ा न पिएं।
  • चाहें तो आप एक दिन के अंतराल के बाद भी इसका सेवन कर सकते हैं।
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काढ़ा बनाएं, मगर हिसाब सेः

  • सभी मसालों व जड़ी-बूटियों को सही अनुपात में लें।
  • हल्दी, अदरक व शहद की मात्रा को अधिक ना रखें।
  • फूड पाईप में जलन से बचाव के लिए चुटकी भर काली मिर्च पाउडर का ही इस्तेमाल करें।
Written by: Vanshika Saini

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