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चीन कर रहा है भारत को घेरने की तैयारियां, जाने कैसे?

सांकेतिक चित्र

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वैसे तो चीन अपनी करनी के लिए सुर्खियों में हमेशा से ही रहता है। लेकिन जहां एक तरफ भारत वुहान वायरस से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी ओर, चीन भारत के संकट का फायदा उठा रहा है। आपको बता दें कि चीन ने तिब्बत में एक रणनीतिक राजमार्ग का निर्माण पूरा कर लिया है। एक राजमार्ग जो भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के बहुत करीब है।

शी जिंनपिंग

रिकॉर्डस् के मुताबिक यह हाईवे सात साल से निर्माणाधीन है।  चीन ने इस परियोजना पर भारी राशि खर्च की हैं लगभग 310 मिलियन डॉलर। यह तिब्बत की ओर से ब्रह्मपुत्र नदी की एक भव्य घाटी के रूप में गुजरता है।  साथ ही इसी हाईवे से अरुणाचल प्रदेश के साथ विवादित सीमा पर दूर-दराज़ के इलाकों में चीन की पहुंच बेहतर हो सकेगी।

वहीं शी जिनपिंग ने भी अब एक बड़े बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने का आदेश दिया है।  जिसमें सड़कों, राजमार्गों, गांवों और सैन्य चौकियों का निर्माण शामिल है।

इसी के साथ सैटेलाइट चित्रों से पता चलता है कि चीन ने भूटानी क्षेत्र के अंदर तीन गांव बनाए हैं।  जनवरी 2021 में ली गई तस्वीरों में तिब्बत को इन तीनों में से एक गांव से जोड़ने वाली सड़क भी दिखाई दे रही है।  इन गांवों को ‘ग्याला फुग’ कहा जाता है। तीन में से दो गांव पहले से ही कब्जे में हैं।  मई 2021 के पहले सप्ताह तक एक गांव निर्माणाधीन था।

इन तीन गांवों में सब कुछ है।  66 मील की नई सड़कें, एक छोटा जल-विद्युत स्टेशन, दो कम्युनिस्ट पार्टी प्रशासनिक केंद्र, एक संचार बेस, एक आपदा राहत गोदाम, पांच चौकी। इन गांवों में सैन्य अड्डे के रूप में सेवा करने के लिए सब कुछ है।  उनके पास सुरक्षा स्थल, सिग्नल टॉवर, एक सैन्य अड्डा और यहां तक ​​कि एक सैटेलाइट से जोड़ने वाला स्टेशन भी है।  यह सब भूटान के सुदूर उत्तर में बनाया गया है।

बता दें कि कम्युनिस्ट पार्टी के तिब्बत सचिव ने ग्याला-फुग में ग्रामीणों से मुलाकात की और ग्रामीणों से कहा कि “उज्ज्वल पांच सितारा लाल झंडा ऊंचा उठाएं”। अर्थात् वे भूटान में चीनी झंडा फहराने की बात कर रहे हैं।

चीन अपनी ‘दक्षिण चीन सागर रणनीति’ को हिमालय तक ले जा रहा है।  साथ ही विवादित क्षेत्र पर दावा करने के लिए ढांचों का निर्माण भी कर रहा है। इसी के साथ चीन ने तिब्बत पर एक नया नीति पत्र जारी किया है।  जिससे पता चलता है कि कैसे शी जिंनपिंग ने सीमा पर निर्माण गतिविधियों में बेशुमार पैसा लगाया है।

2019 की रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन की तिब्बत की सीमाओं पर 624 “अच्छी तरह से बंद” गांवों और खेतों के निर्माण की योजना थी। वहीं 2020 तक, चीन ने कहा कि सीमावर्ती गांवों में से कई राजमार्गों से बेहतर तरीके से जुड़े थे। और ऐसे सभी गांवों में मोबाइल संचार की पहुंच भी है। तो अब अरुणाचल प्रदेश के पास एक राजमार्ग और भूटान में चीनी गांव किस बात की ओर इशारा करता है।

आपको नहीं लगता कि यह सारी निर्माण गतिविधि जमीन पर तथ्यों को एकतरफा बदलने की चीन की कोशिश है।  अतिक्रमण और उपनिवेश के माध्यम से। क्योंकि चीन की ‘दक्षिण चीन सागर रणनीति’ और हिमालय की तरफ बढ़ते कदम तो इसी बात की गवाही दें रहे है। महामारी हो या न हो, चीन पीछे नहीं हट रहा है।  और भारत को वाकई सतर्क रहने की जरूरत है।

BY: ABHISHEK SOAM

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