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खगोलीय एवं ज्योतिषीय घटनाक्रम से पूर्ण रहेगा मई का अंतिम सप्ताह

Astronomical and Astrological Events

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मई माह का यह अंतिम सप्ताह भौगोलिक एवं ज्योतिषीय घटनाओं के लिए जाना जाएगा । 23 मई रविवार से 29 मई शनिवार तक
भौगोलिक दृष्टि से कई घटनाक्रम होंगे।
23 मई को दोपहर 14:50 बजे शनि वक्री होंगे। इसके फलस्वरूप कोरोना महामारी में कमी आएगी। किंतु प्राकृतिक घटनाएं घटेंगी।

23 मई को त्रिस्पृशा एकादशी है, जो दो-तीन वर्ष के बाद आती हैः

पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य

बता दें कि जब एक दिन अर्थात 24 घंटे में तीन तिथियों का संगम होता है उसे त्रिस्पृशा एकादशी कहते है। 23 तारीख को प्रातः 6:42 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी और रात्रि 3:38 तक द्वादशी रहेगी और उसके पश्चात सूर्य उदय से पहले ही प्रातः 3:38 बजे त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी।
शास्त्रों में त्रिस्पर्शा एकादशी का बड़ा महत्व है। इसका व्रत करने से अन्य एकादशियों की तुलना में कई गुना फल मिलता है। इसलिए इस एकादशी को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

24 मई को सोम प्रदोष व्रत हैः

सोमवार को त्रयोदशी तिथि का होना बहुत शुभ होता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोम प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व है। इस दिन व्रत के साथ-साथ रुद्राभिषेक व महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदाई होता है।

25 मई को नौतपा आरंभ होगाः

नौतपा उसे कहते हैं जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आता है। पृथ्वी पर गर्मी की प्रचण्डता आरंभ होती है । 9 दिन तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं।
शास्त्रों के नियमों के अनुसार यह 9 दिन सूर्य के किरणों को प्रचंड बनाते हैं और यही 9 दिन मानसून के आने के लिए कारण बनते हैं। किंतु इस बार शनि वक्री, बुध वक्री और शुक्र का मिथुन में प्रवेश होने से यह सप्ताह आंधी, तूफान, वर्षा का रहने वाला है। इसलिए इस वर्ष नौतपा का प्रभाव कम रहेगा।

26 तारीख को चंद्रग्रहण का योग हैः

जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों और विदेशों में दिखाई देगा। भारत के अन्य भागों में उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और ना ही सूतक विचार होगा।
26 तारीख को इस बार सुपरमून के दर्शन होंगे। क्योंकि चंद्र ग्रहण जब दिन में होता है। तो उस पूर्णिमा की शाम को चंद्रमा लाल रंग के दिखाई देते हैं। इसे ब्लड मून भी कहते हैं।
पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी कम होने कारण यह बड़ी आकृति में दिखाई देंगे।
26 तारीख को शिप्रा नदी के तट पर नासिक में अर्द्ध कुंभ का भी स्नान होगा और 26 तारीख को वैशाखी पूर्णिमा और भगवान बुद्ध जयंती है।28 मई को मिथुन राशि में शुक्र का प्रवेश रात्रि 23: 59 बजे होगा।
30 मई को प्रातः 4:04 बजे बुध वक्री होंगे। जिस सप्ताह दो ग्रह वक्री हो और अन्य ग्रह राशि परिवर्तन करता है इस सप्ताह में प्राकृतिक उथल-पुथल रहती है। मौसम खराब, आंधी, तूफान, वर्षा चक्रवात आदि के योग बनते हैं।
28 मई को ब्रह्मांड के पहले पत्रकार देव ऋषि नारद जयंती है। यह पत्रकारिता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
इस प्रकार यह सप्ताह उपरोक्त भौगोलिक एवं ज्योतिषीय घटनाक्रम से पूर्ण रहेगा ।मौसम में उठापटक रहेगी।

-पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य, गाजियाबाद।

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