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फेफड़ों को मजबूत करने और ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए कारगर है ये थैरेपी

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कोरोनावायरस की दूसरी लहर ने सब को विचलित कर के रख दिया है। कोरोनावायरस का सबसे बड़ा हमला मनुष्य के फेफड़ों पर होता है। जो फेफड़ों को कमजोर कर के व्यक्ति को मृत्यु के मुंह में धकेल देता है। फेफड़ों की ऑक्सीजन कम हो जाती है। जिस व्यक्ति के फेफड़े मजबूत होते हैं ,उसको कोरोनावायरस नहीं होता, ऐसा डॉक्टरों का मानना है।

कुछ डॉक्टर्स कोरोना मरीजों को गुब्बारा फुलाने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि गुब्बारा फुलाने से फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। और उसके अंदर जमा हुआ मल व वायरस कम हो जाता है।
गुब्बारा फुलाने की थैरेपी तो आज लोग अजमा रहे हैं। लेकिन हमारे प्राचीन ऋषियों ने घर में सुबह और शाम शंख बजाने की सलाह लाखों वर्ष पूर्व दी थी।

क्या है शंख थैरेपी, विस्तार से जानते हैं इसके बारे मेंः

1. शंख बजाने से व्यक्ति की सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है। सैनिक बैंड में जो सैनिक परेड के समय अथवा स

shell
शंख

लामी के समय तांबे का

बिगुल बजाते हैं वह भी इसी श्रेणी में आता है।
शंख बजाने से हमारे फेफड़ों में फुलाव आता है। फेफड़ों के अंदर नई वायु का संचरण होता है जो ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है।
नियमित रूप से शंख बजाने से कभी भी हृदय रोग और फेफड़ों का रोग नहीं होता है। प्राचीन काल में घर घर में शंख वादन हुआ करते थे ।पूजा के समय प्रातः सायं लोग शंख बजाते थे।
2. जिस स्थान पर शंख बजता है, उस क्षेत्र में उपस्थित हानिकारक कीटाणु या तो वह स्थान छोड़ देते है या मर जाते हैं।।
3. प्रतिदिन शंख बजाने से गुदाशय की मांसपेशियां मजबूत होती हैं । शंख बजाना मूत्राशय ,डायाफ्राम, छाती और गर्दन की मांसपेशियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। प्रतिदिन शंख बजाने से इन सभी अंगो का व्यायाम हो जाता है।
4. शंख बजाने से हमारे थायराइड ग्रंथियां और स्वर यंत्र को भी लाभ होता है। बोलने से संबंधित किसी भी प्रकार की

समस्या को ठीक करने के लिए शंख वादन बहुत ही सहायक होता है।
5. जब हम शंख बजाते हैं तो हमारे चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। इससे चेहरे की झुर्रियां घट जाती हैं।
6. तनाव से बचने के लिए शंख वादन करना बहुत ही उपयोगी है।
जो लोग नियमित शंख हो जाते हैं। उनके अंदर तनाव व मानसिक थकान कम देखी गई है।
7. शंख वादन से हमारे शरीर के नसें खुल जाती हैं। हार्ट के ब्लॉकेज भी ठीक होते हैं। क्योंकि शंख बजाने के लिए बार-बार सांस भरना और छोड़ने से प्राणायाम भी हो जाता है।
8. जिन लोगों को सांस लेने की दिक्कत है अथवा फेफड़ों में कोई परेशानी है अथवा स्मरण शक्ति कमजोर है तो शंख के बजाने से धीरे-धीरे सुधार होना आरंभ हो जाता है।
9. बर्लिन विश्वविद्यालय में शंख ध्वनि पर जो शोध किया है उन्होंने पाया कि शंख ध्वनि की तरंगे हानिकारक.बैक्टीरिया और अन्य रोगाणुओं को नष्ट करने के लिए उत्तम और सस्ती औषधी है।
10. शंख में कैल्शियम और फास्फोरस बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसीलिए शंख में जल भरकर सुबह-शाम सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं।
11. वास्तु दोष निवारण में भी शंख ध्वनि बहुत कारगर है। घर के किसी कोने में वास्तु दोष हो अथवा अशुद्धि हो उस कोने में शंख बजाने से वहां का वास्तु दोष का निवारण हो जाता है।
12. उत्तर अथवा उत्तर पूर्व क्षेत्र में यदि कोई वास्तु दोष हो तो दक्षिणावर्ती शंख में चावल भरकर रखें। अथवा रात्रि को शंख में जल भरकर रखें और प्रातकाल उसको सारे घर में छिड़क दें।

 

शंख कई प्रकार के होते हैं।
जैसे पांचजन्य शंख, विष्णु शंख, दक्षिणावर्ती शंख, लक्ष्मी शंख, गणेश शंख, मोती शंख आदि।
सब के अलग-अलग उपयोग हैं।
किंतु घर में बजाने के लिए एक सामान्य शंख अवश्य रखना चाहिए।
अक्सर देखने में आता है कि कुछ घरों में शंख तो होते हैं किंतु बहुत छोटे होते हैं। इससे बजाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा लगती है।
इसलिए यदि आपको घर में बजाने के लिए शंख चाहिए तो शंख बड़ा और अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए।

पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य

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