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सचमुच में होती हैं भूतों की दुनिया


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भूत सच में होते हैं कि नहीं ये सवाल हर किसी के मन में कभी ना कभी तो आता ही है। फिर चाहे बात आपके बचपने की ही क्यों ना की जाए। वैसे आमतौर पर दुनियाभर के लोग इस बारे में सोचते हैं और विश्वभर के वैज्ञानिक इस पर खोज में भी जुटे हुए हैं। कई के हाथ निराशा लगी तो कई के हाथ बेहद भयानक तजुर्बा और इसके चलते कई वैज्ञानिकों ने बहुत से दावे भी किए। जिनमें से कुछ दावे खोखले तो कुछ दावे भूत जैसे किसी चीज़ के अस्तित्व को स्वीकारते हुए दिखाई दिए।

तो आज हम जानते हैं कि भूतों के बारे में खोज करने पर वैज्ञानिकों ने क्या-क्या और कैसे कैसे  दावे किए हैं…

वैसे तो दुनियाभर में सभी धर्म तथा संस्कृति भूत प्रेतों पर विश्वास करते हैं। और कमाल की बात ये है कि भूतों का अनुभव करने का दावा दुनिया में ज्यादातर लोग करते हैं और आज भी भूतों के बारे में अनगिनत भूतिया घटना प्रचलित हैं। जो बरसों से ही चली आ रही हैं। लेकिन इन कहानियों में कितनी सच्चाई है और लोगों को ऐसी घटना के दौरान कैसा अनुभव होता है ये बात बेहद ही दिलचस्प दिखाई देती है। तो आइए, विज्ञान की दृष्टि से भूतों की क्या परिभाषा होती है वो जानते हैं।

इनर्फरा साउंड (Infrasound)

आमतौर पर कहा जाता है कुत्ते और बिल्लियों को भूतों का एहसास जल्दी होता है हम मनुष्य 20 HZ से लेकर 20000 HZ तक की फ्रिकवेंसीज की आवाजें सुन सकते हैं। विज्ञान के मुताबिक 20 HZ फ्रिकवेंसीज से नीचे की फ्रिकवेंसीज सुनना बहुत ही मुश्किल है और इन तरह की आवाजों को इंफ्रासाऊंड कहा जाता है।

लेकिन इन खामोश आवाजों को कुत्ते और बिल्ली जैसे जानवर बड़ी आसानी से सुन सकते है। डॉक्टर रिचर्ड वॉइस मैन के मुताबिक हम इंसान इंफ्रासाउंड को सुन तो नहीं सकते लेकिन इसकी तरंगों को अपने पेट में महसूस जरूर कर सकते हैं। और ये तरंगे हमारे मन में नकारात्मक तथा सकारात्मक फिलिंग्स उत्पन्न करती हैं। हमारी आंखों की हलचल भी इंफ्रा साउंड को उत्पन्न करती हैं।

वहीं 2019 में IPSOS POLL मैं यह बात सामने आई थी कि लगभग 50% अमेरिकी लोग भूतों में विश्वास रखते हैं सोशियोलॉजीस्टिक डेनिश एंड मिशेल वासु कॉल ने साल 2016 में एक किताब लिखी जिसका नाम था GHOSTLY ENCOUNTERS THE HAUNTINGHS OF EVERYDAY LIFE। इसमें अनेक लोगों के द्वारा भूतों के अनुभव पर कहानियां लिखी थीं। लेकिन इस किताब से यह बात सामने निकलकर आई कि जो इमेज उन्होंने देखी वह भूत जैसी नहीं थी। उनका यह कहना था कि जो घटना हमारे साथ हुई है वह परिभाषित नहीं हो सकती। परंतु वे रोंगटे खड़े करने वाली घटना थी तथा रहस्यमय है लेकिन इनमें भूतों की इमेज देखने को नहीं मिली।

इसके अलावा जून 2013 गाजीपुर बांग्लादेश में एक सरकारी फैक्ट्री के 3000 वर्कर्स ने हड़ताल कर दी और इसका कारण बहुत ही हैरान करने वाला था। लोग इसलिए विरोध कर रहे थें कि लेडीस टॉयलेट में एक नाराज आत्मा ने एक महिला वर्कर पर हमला कर दिया था। जिससे सभी वर्कर्स दुखी हो गए और वहां दंगा शुरू हो गया। हालात को काबू करने के लिए वहां पुलिस द्वारा लाठीचार्ज भी करवाना पड़ा दरअसल, वहां के वर्कर  यह मांग कर रहे थे कि भूतों को वहां से भगाया जाए।

जो लोग भूत में विश्वास करते हैं  उनके अनुसार भूत उन लोगों की आत्माएं हैं जिनकी कोई बड़ी ही महत्वपूर्ण इच्छा या काम पूरा नहीं होता और मरने के बाद भी उनकी इच्छाएं अधूरी रहती हैं। और इसी के चलते वह एकदम पूरी तरह से पीछे इन हो जाती हैं और उन्हें तब तक मुक्ति नहीं मिलती जब तक उनकी इच्छा पूरी ना हो जाए। वह उन जगह पर अक्सर दिखते हैं जो उन्हीं से जुड़ी होती हैं जैसे कोई घर या फिर कोई विशेष जगह। कभी-कभी तो यह किसी व्यक्ति के अंदर भी चली जाती हैं ऐसी हजारों नहीं लाखों घटनाएं हो चुकी हैं। इस दुनिया में जिसमें हम सुनते हैं कि किसी भूत ने किसी इंसान को मार दिया बॉलीवुड में घोस्ट के ऊपर कई मूवी बनाई गई हैं और उनमें से कई इंटरटेनमेंट के लिए हैं और कई सच्ची घटना पर आधारित है।

जब विज्ञान की दृष्टि से भूतों के बारे में सोचा जाता है तो इस बात पर खास ध्यान दिया जाता है कि क्या भूत बिना दरवाजे खोले अंदर जा सकते हैं या एक कमरे से कोई वस्तु एक स्थान से दूसरे स्थान तक फेंक सकते हैं इन चीजों पर कई विवाद हैं।

एक महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने भूतों की मौजूदगी पर एक थ्योरी लिखी थी। यह था थर्मोडायनेमिक्स का पहला नियम अर्थात उर्जा को ने तो बनाया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है। मतलब हमारे शरीर की जो ऊर्जा होती है वह हमारे मरने के बाद हमारे आसपास के वातावरण में चली जाती है। मनुष्य के मरने के बाद ऐसी कोई  ऊर्जा नहीं है जो किसी तांत्रिक किया घोस्ट हंटर द्वारा देखी जा सके। ऐसे लोग जानबूझकर ड्रामा करते हैं क्योंकि शरीर से निकलने वाली ऊर्जा इतनी छोटी होती है जो पकड़ में नहीं आ सकती, और इस तरह की ऊर्जा हमारे वातावरण में बहुत अधिक मात्रा में है।

भूत वास्तव में है या नहीं, यह ऊर्जा होती है या नहीं, वैज्ञानिक दृष्टि से कुछ भी नहीं खोजा गया इसके दो कारण हो सकते हैं।

पहला– की भूत होते नहीं हैं यह लोगों का काल्पनिक वहम  होता है।

दूसरा- अगर भूत वास्तव में होते हैं तो हमारे पास उनकी खोज के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है, जिससे हम यह पता लगा सकें कि भूत होते हैं या नहीं।

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