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शिव जी को नापसंद है ये चीजें, गलती से भी ये ना चढ़ाये…


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भगवान शिव अपने भक्तों पर हमेशा दयालु रहते हैं। भोलेनाथ को सादगी से बेहद लगाव है और जो भी भक्तजन प्रभु को सच्चे मन से ध्याता है महादेव उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। वैसे तो भगवान शिव को सभी दिन पसंद होते है, लेकिन सोमवार से इनके अलग ही लगाव है। और बात जब श्रावण मास की हो तो ये तो शंभू का पसंदीदा माह होता है।

ऐसा कहा जाता है कि सावन में शंकर की कृपा दृष्टि सभी पर बनी रहती है। और सभी भक्तजनों की सारी इच्छाऐं भी पूर्ण होती हैं।

सावन का पवित्र माह में हर कोई अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए शिव-शम्भू को अलग-अलग चीज अर्पित करते हैं और प्रार्थना करते है। लेकिन हम में से बहुत कम लोग हैं जिन्हे ये नहीं पता कि भोलेनाथ की मूर्ति या शिवलिंग पर कुछ चीज़े ऐसी हैं जो चढ़ाना वर्जित माना गया हैं।

जैसे कि केतकी, केवड़े का फूल, तुलसी, मेहंदी, हल्दी, कुमकुम, रोली, सिंदूर खंडित अक्षत, तिल, नारियल या नारियल का पानी आदि।  लेकिन ऐसा क्यों आज हम बतायेंगे आपको इसके पीछे के कारण…

जाने सावन के सोमवार की महिमा…

  • हल्दी

हल्दी को भी प्राचीन काल से शगुन के संकेत के रूप में ही देखा जाता है। और ज्यादातर पूजा-पाठ में हल्दी का इस्तेमाल भी किया जाता है लेकिन पीतांबर होने के कारण विष्णु भगवान को हल्दी पसंद है इसीलिए उनकी पूजा में हल्दी का प्रयोग किया जाता है।

साथ ही देवी की पूजा में भी हल्दी के साथ-साथ कुमकुम, रोली, सिंदूर और मेहंदी भी देवी को अर्पित किए जाने के कारण हल्दी भोलेनाथ को नहीं चढ़ाई जाती है।

  • मेहंदी

हाल तो मेहंदी को सुहाग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है इसलिए सुहागने अपने हाथों पर मेंहदी लगाया करती है। मेहंदी को शगुन की दृष्टि से देखा जाता है।

बता दें कि मेंहदी भगवान शिव को नहीं अपितु माता पार्वती को प्रिय है, माता को मेंहदी से श्रृंगार करना काफी पसंद है। और इसीलिए मेंहदी माता पर्वती को अर्पित की जाती है।

  • तुलसी

तुलसी को भगवान शिव को ना अर्पित करने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है, जिसका जुड़ाव जलंधर नाम के असुर से जुड़ी है, जो काफी दुष्ट प्रवृत्ति का था। दिखने में एकदम शिव जैसा लेकिन दुष्ट, इसे यह वर प्राप्त था कि कोई भी उसका वध नहीं कर सकता था।

जिसके कारण उसमें अहंकार आ गया और वह लोगों पर अन्याय करने लगा। जिसकी सभी सीमाऐं खत्म हो र किया है। जिस कारण तुलसी को शिव पूजा में अर्पित नहीं करते हैं। यह भी कहा जाता है कि जलंधर का वध करने के लिये भगवान शिव ने विष्णु के साथ मिलकर छल किया था ताकि उसका वध किया जा सकें। जिसके बाद जलंधर पुत्री तुलसी ने शिव को अपने स्वरूप से वंचित कर दिया। इसीलिए शंभू को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।

Written By: Asmita Shukla

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